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पंजाब के मुख्यमंत्री ने स्कूल अध्यापकों के लिए ऑनलाईन ट्रांसफर नीति के अधीन बटन दबा कर पहले तबादले का आदेश जारी किया

पंजाब के मुख्यमंत्री ने स्कूल अध्यापकों के लिए ऑनलाईन ट्रांसफर नीति के अधीन बटन दबा कर पहले तबादले का आदेश जारी किया 
पारदशर््िाता लाने और भ्रष्टाचार ख़त्म करने को यकीनी बनाने के लिए अन्य विभागों में भी यह प्रणाली लागू करने की योजना का ऐलान 
चंडीगढ़, 30 जुलाई: 
    पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने नई तबादला नीति के अधीन अध्यापकों के तबादले के लिए बटन दबा कर पहले तबादले के आदेश जारी किया। इसका उद्देश्य तबादला प्रणाली में मुकम्मल पारदर्शिता को यकीनी बनाना है। 
    स्कूल शिक्षा विभाग की इस नई नीति को इस साल जनवरी में मंत्रीमंडल ने मंजूरी दी थी और जून में इसको नोटीफाई किया गया था। इस नीति के अधीन टीचिंग स्टाफ के सभी तबादले सिफऱ् ऑनलाईन ही किये जाएंगे और इसमें कोई भी मानवी दख़ल-अन्दाज़ी नहीं होगी। इससे इन तबादलों में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का ख़ात्मा हो जायेगा। 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नीति को अन्य विभागों में लागू करने की भी उनकी सरकार की योजना है। इस प्रणाली से मुकम्मल पारदर्शिता का युग शुरू हो गया है। कम्प्यूटर से चलने वाली इस प्रणाली में किसी भी तरह का पक्षपात होने की कोई संभावना नहीं है। इसके अधीन कारगुज़ारी को स्थान दिया गया है। 
    मुख्यमंत्री द्वारा ऑनलाईन तबादला आदेश जारी करने के बाद एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि तबादलों के लिए कुल 11063 आवेदन प्राप्त हुये थे इनमें से 4551 के लिए ऑर्डर जारी कर दिए गए हैं जबकि पहले दौर के दौरान 6506 आवेदनों पर कार्यवाही नहीं की गई। 
    इस मकसद के लिए स्कूलों को 5 ज़ोनों में बाँटा गया था। तबादलों के विरुद्ध दावों का फ़ैसला करने के लिए विस्तृत मापदंड तैयार किये गए। इन मापदण्डों में सेवा काल, आयु, महिलाएं, विधवाएं, तलाकशुदा, अविवाहित महिलाएंं, अपंग व्यक्तियों, पति-पत्नी मामलों जैसी विशेष श्रेणियों के लिए अंक रखे गए हैं। 
    इसके अलावा अध्यापकों की कारगुज़ारी के लिए कुल 250 में से 90 अंक मुहैया करवाए गए। इससे इस प्रणाली को पूरी तरह कारगुज़ारी आधारित बनाया गया। इसमें अध्यापकों के नतीजे, सालाना गुप्त रिपोर्ट आदि के अनुसार कारगुज़ारी शामिल की गई। इसके अलावा 15 अंक उन अध्यापकों को मुहैया करवाए गए जिनके बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। इसका उद्देश्य अध्यापकों को अपने बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के लिए प्रेरित करना है। इसके साथ ही इसका मकसद शिक्षा के मानक और कारगुज़ारी को भी बढ़ाना है। 
    अध्यापकों की कुछ श्रेणियों को मैडीकल आधार पर तबादला नीति से मुकम्मल छूट दी गई। इन में कैंसर के मरीज़ /डायलसिज़ पर, हैपोटायटस बी, हैपोटायटस सी, सिकल सैल अनीमिया, थैलेसीमिया आदि के साथ पीडि़त शामिल थे। 
    इस नीति के अनुसार जब एक बार तबादले के आदेश जारी कर दिए जाते हैं तो नये स्टेशन पर 3 साल गुज़ारे जाने से पहले अध्यापक को नये तबादले के लिए नहीं विचारा जायेगा। अगर किसी अध्यापक का रिश्तेदार उसके अपने स्कूल के नज़दीक कोई निजी स्कूल चलाता है, उस मामले में इस नीति में भी उस संबंधी भी व्यवस्था की गई है। 
    गौरतलब है कि मंत्रीमंडल द्वारा मंजूरी के बाद मार्च 2018 में इस नीति के सम्बन्ध में प्रक्रिया शुरू की थी, परन्तु कुछ अध्यापक यूनियनों द्वारा इस संबंधी सुझाव दिए गए जिस कारण इसमें कुछ संशोधन किए गए जिनको यूनियनों ने सहमति दे दी। 
    इस मौके पर उपस्थित अन्यों में पी.डब्लयू.डी और शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रमुख सचिव सुरेश कुमार, सचिव कृष्ण कुमार, विशेष सचिव शिक्षा मनवेश सिद्धू, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री तेजवीर सिंह, डी.जी.एस.ई मुहम्मद तैय्यब और डी.पी.आई सेकेंड्री सुखजीत पाल सिंह उपस्थित थे। 
 

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