• English
  • ਪੰਜਾਬੀ

Current Size: 100%

Select Theme

क्या आप जानते हो कि कृषि होती क्या है? कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमन को पुछा

क्या आप जानते हो कि कृषि होती क्या है? कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमन को पुछा
खेती आमदन दोगुनी करने संबंधी केंद्र सरकार के वायदे को रद्द किया
किसानों के सर पर चढ़े कजऱ्े के लिए बैंकों को समस्या की जड़ बताया
हमारी सरकार किसानों की ज़मीन की कुर्की की इजाज़त नहीं देगी-मुख्यमंत्री
चंडीगढ़, 17 मार्च:
मुल्क का पेट भरने वाले पंजाब के किसानों की बाह न पकडऩे पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आज ऐलान किया कि उनकी सरकार संकट में डूबे किसानों की ज़मीन की कुर्की करने की इजाज़त नहीं देगी। उन्होंने कहा कि किसानों को कजऱ्ों और जायदादों को गहने रखकर बैंकों द्वारा बुरी तरह से उलझाया हुआ है।
अपनी सरकार के गठन की तीसरी वर्षगांठ के मौके पर एक सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा किसानों की आमदन दोगुनी करने के दावे को रद्द करते हुए केवल लीपापोची बताया क्योंकि केंद्र के पास आमदन दोगुनी करने का कोई ठोस एजेंडा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘केंद्रीय मंत्री को यह पता है कि कृषि होती क्या है?’’ उन्होंने माँग की कि केंद्रीय वित्त मंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किसानों की आमदन बढ़ाने के लिए केंद्र की क्या योजना है। परन्तु इससे पहले यह यकीनी बनाएं कि पंजाब से अनाज का एक-एक दाना उठा लिया गया है और इसको गोदामों में सडऩे की इजाज़त नहीं दी गई।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन पर एक और चुटकी लेते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उसकी तरह से वह आंकड़ों को घुमा-फिरा कर नहीं बता सकते परन्तु उनका विश्वास है कि सही माहौल और सहायता देने से पंजाब के मेहनती किसान और उद्योग अपने स्तर पर ही अपनी आमदन बढ़ा सकते हैं।
फसलों के लिए न्युनतम समर्थन मूल्य को ख़त्म करने संबंधी केंद्र सरकार द्वारा की जा रही विचार की रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि यदि केंद्र यह समझता है कि धान और गेहूँ के भंडार अब फ़ाल्तू हैं तो उसे राज्य के किसानों को और संकट में उलझाने की बजाय वैकल्पिक फसलों के लिए न्युनतम समर्थन मूल्य देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुल्क की अन्न सुरक्षा का सेहरा पंजाब के किसानों को जाता है।
पंजाब के किसान भाईचारे के लिए केंद्रीय मदद देने संबंधी ज़ोरदार पक्ष रखते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार पंजाब के किसानों की बाह पकड़े और उनको फ़सलीय विभिन्नता अपनाने में सहायता करे। उन्होंने कहा, ‘‘पंजाब आपके साथ कंधे से कंधा जोडक़र चलता रहा, अब आप भी फ़सलीय विभिन्नता संबंधी हमारे प्रोग्राम को सहायता देकर हमारे साथ खड़े हों।’’
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर बरसते हुए कहा कि यह सरकार वह समय भूल गई है जब मुल्क भूखा मर रहा था तो उन हालातों में पंजाब मुल्क को बचाने के लिए आगे आया था। मुख्यमंत्री ने ज़ोर देते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र की सहायता करनी होगी। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र ने कृषि के विकास या ओद्योगीकरण के लिए अपना सहयोग न दिया तो पंजाब कहाँ जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में भी बाग़बानी और विभिन्नता के अन्य तरीकों के द्वारा थोडी ज़मीन वालों के लिए कृषि को लाभप्रद बनाने के ढंग ढूँढने पड़ेंगे जैसे कि जापान ने किया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार फलों की काश्त के तजुर्बे कर रही है जिसको वक्त लगेगा और केंद्र को भी किसानों का समर्थन करना चाहिए।
किसानों के सर पर कजऱ्े की भारी गठरी के संदर्भ में कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बैंकों को इस समस्या की जड़ बताते हुए कहा कि बैंकों ने किसानों को उनकी ज़मीन और जायदाद को गहने रखकर निर्धारित सीमा से अधिक कजऱ् दिया जिस कारण किसानों ने यह पैसा ग़ैर-उत्पादन कामों में ख़र्चना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि इन किसानों की मदद करना बहुत ज़रूरी है जिस कारण राज्य सरकार ने राज्य की कमज़ोर वित्तीय हालत की परवाह न करते हुए किसानों का अधिक से अधिक कजऱ् माफ करने का यत्न किया परन्तु अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
राज्य में घट रहे जल संसाधनों पर दुख ज़ाहिर करते हुए मुख्यमंत्री ने दोहाराया कि पंजाब के पास किसी को भी देने के लिए फ़ाल्तू पानी नहीं क्योंकि भूजल का स्तर बहुत नीचे चला गया है और सरकार द्वारा अब पीने वाले पानी के लिए बड़े शहरों को नदी वाले पानी की सप्लाई करने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इजऱाइल की कंपनी मेकोरोट पंजाब की मदद कर रही है और राज्य को दिक्कत यह है कि इसके पास खारापन दूर करके बरतने के लिए समुद्री पानी नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से इस कार्य के लिए भी सहायता की ज़रूरत है।
--------------

back-to-top